जाने बच्चों में टाइफाइड के लक्षण (typhoid ke lakshan) और उपाय

टाइफाइड के लक्षण (typhoid ke lakshan) के इस आर्टिकल में बच्चों को होनेवाले टाइफाइड की विस्तृत जानकारी दी गयी है।

बच्चे काफी नाजुक होते है, और हर माता-पिता अपने बच्चे को हंसते-खेलते और स्वस्थ रखने के लिए हमेशा प्रयास करते है। बच्चों के शारीरिक, भौतिक और मानसिक विकास में पेरेंट्स की देखभाल काफी महत्वपूर्ण रहती है। बदलते मौसम में बच्चो के स्वास्थ पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता होती है, क्यों की  बड़ों की तुलना में बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। ऐसे में उन्हें बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण के कारण कुछ बीमारियों का खतरा हो सकता है। टाइफाइड भी एक बैक्टीरियल संक्रमण से होने वाली बीमारी है। इम्युनिटी कम होने के कारण बच्चे आसानी से इसकी चपेट में आ सकते हैं। 

टाइफाइड क्या है? बच्चों में टाइफाइड होने के क्या कारण होते है? बच्चों में टाइफाइड के लक्षण (typhoid ke lakshan) क्या होते है? बच्चों में टाइफाइड के लक्षण कैसे पहचाने? बच्चो में टाइफाइड का इलाज कैसे हो सकता है? अपने बच्चों को टाइफाइड से कैसे बचाएं? और हमें डॉक्टर्स के पास कब जाना चाहिए? इन सभी बातों की चर्चा हम home child care के इस आर्टिकल में करेंगे। 

बच्चों में टाइफाइड के लक्षण और उपाय
बच्चों में टाइफाइड के लक्षण और उपाय

सबसे पहले टाइफाइड की definition को जानते हैं।

टाइफाइड क्या है?

टाइफाइड (टाइफाइड ज्वर) एक गंभीर रोगों में से एक है, जो कभी-कभी जानलेवा भी हो सकती है। यह बुखार साल्मोनेला टाइफी (Salmonella Typhi) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। दूषित भोजन या पानी के सेवन से भी टाइफाइड हो सकता है। यदि सही समय पर उपचार ना किया जाएँ तो टाइफाइड से मृत्यु होने की  30 प्रतिशत  शक्यता होती है। टाइफाइड दुनिया भर में हर साल लगभग 2.1 करोड़ लोगों को होता है और लगभग 2 लाख लोग इसके कारण मौत का शिकार होते हैं।

सामान्य तौर पर टाइफाइड एक ऐसी बीमारी है जो बच्चों और बड़ों में अवधि, लक्षण, कारण व उपचार आदि की प्रक्रिया में एक सामान होती है।

बच्चों में टाइफाइड होने के कारण

बच्चो में या फिर कहे तो बड़ों में भी टाइफाइड होने के मुख्य तिन कारण होते है। हमारे शरीर में साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया का संक्रमण हमे इस बीमारी का शिकार बनाता है।

  • दूषित या विषाक्त भोजन – जो भोजन कच्चा या अधपका है, खासतौर पर मांसाहारी भोजन, या वह भोजन जो आउट ऑफ़ डेट है, सही ढंग से रेफ्रीजिरेटेड नहीं किया गया है या किसी संक्रमित व्यक्ति द्वारा छुआ हुआ भोजन जो साल्मोनेला टाइफी जैसे बैक्टीरिया से संक्रमित है अगर आपका बच्चा किसी ऐसे भोजन या पदार्थ का सेवन करता है, तो यह टाइफाइड का कारण बन सकता है।
  • दूषित पानी – विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि दुनिया भर में 80% बीमारियाँ दूषित पानी से उत्पन्न होती है। दूषित पानी में कई तरह के विषैले बैक्टीरिया होते है जो दूषित पानी या पेय पदार्थों के जरिए आपके बच्चों के पेट में जाते है, और टाइफाइड जैसे बिमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
  • संक्रमित व्यक्ति के जरिए – संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने सभी बच्चों को टाइफाइड हो सकता है।

यह थे बच्चों को टाइफाइड होने के कुछ प्रमुख कारण, अब हम जानते है की, बच्चों में टाइफाइड के लक्षण क्या होते है 

बच्चों में टाइफाइड के लक्षण  Typhoid Ke Lakshan

बच्चों में टाइफाइड के लक्षण कुछ इस प्रकार हो सकते हैं।

  • तेज बुखार : हल्‍के बुखार से शुरू होकर बाद में तेज बुखार हो जाता है। यह बुखार उतरता नहीं है जो कि चिंता की बात है।
  • पेट खराब होना : टायफाइड होने पर बच्‍चे को पेट में तेज दर्द और बुखार के साथ दस्‍त हो सकते हैं।
  • भूख कम लगना : बच्‍चे को गले में खराश के साथ भूख कम लगने की शिकायत हो सकती है।
  • थकान : इस इंफेक्‍शन से ग्रस्‍त होने पर बच्‍चे को बहुत ज्‍यादा थकान और कमजोरी हो सकती है। त्‍वचा पर रैश और गुलाबी धब्‍बे दिख सकते हैं, खासतौर पर छाती के निचले हिस्‍से में।
  • वजन कम होना : अगर समय पर इलाज न किया जाए तो कुछ बच्‍चों का वजन भी घट सकता है और पेट में सूजन हो सकती है।

बच्चों में  ऐसे टाइफाइड के प्रमुख लक्षणों के साथ अन्य भी लक्षण दीखते है, जैसे बच्चे के गले में खराश होना, शरीर पर दाने जैसे फोड़े निकलना, लगातार खांसी आना, बच्चे को कंटिन्यू अस्वस्थ रहना, साइन और पेट में लाल चकते पड़ना, ह्रुदय् गति का कमजोर होना, ज्यादा पसीना आना, बच्चों में मानसिक स्थिति बिघड़ना जैसे लक्षण हम देख सकते है।

जब भी आप को अपने शिशु में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो कतई लापरवाही ना बरते, शीघ्र से शीघ्र अपने बच्चे को उपचार के लिए हॉस्पिटल लें जाए और डॉक्टर्स की निगरानी में अपने शिशु का सही इलाज करें।

बच्चों मे टाइफाइड का इलाज

एक बात आप को अवश्य  ध्यान में रखनी चाहिए वह यह है की, किसी भी उम्र में टाइफाइड  का बुखार जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए घरेलु उपचारों पूरी तरह डिपेंड रहना काफी नुकसानदेह हो सकता है। बच्चों को होनेवाले टाइफाइड के लिए डॉक्टर्स की निगरानी में उपचार आवश्यक है। 

एंटीबायोटिक्स – 

टाइफाइड के लक्षणों को पहचानकर  डॉक्टर्स बैक्टीरिया को मारने के लिए और टाइफाइड के असर को कम करने के लिए बच्चे को एंटीबायोटिक्स दवा देते हैं। टाइफाइड का असर पूरी तरह से खत्म करने के लिए यह दवा बच्चे के ठीक होने के बाद भी कुछ समय तक दी जाती है।

तरल पदार्थ –

टाइफाइड के दौरान दस्त के कारन शरीर में भारी पानी की कमी हो सकती है। ऐसे स्थिति में शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए बच्चे को ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ देना चाहिए। टाइफाइड के दौरान अगर किसी बच्चे को गंभीर डिहाइड्रेशन है तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराके सलाइन द्वारा  शरीर में तरल पदार्थ दिया जा जाता है।

हॉस्पिटल ले जाएं –

टाइफाइड एक गंभीर बीमारी है, अगर सही वक्त पर सही उपचार ना मिले तो जान भी जाने का खतरा होता है, ऐसे में अगर टाइफाइड कम ना हुआ हो तो परिस्थिति गंभीर हो सकती है और कुछ बच्चों को ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। ऐसे में उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करना आवश्यक हो जाता है।

बच्चों को टाइफाइड से कैसे बचाएं

अपने बच्चों को हमेशा टाइफाइड से बचाने के लिए, पेरेंट्स को कुछ जरुरी बातों पर ध्यान देना चाहिए, जैसे

स्वच्छ और साफ पानी का इस्तेमाल 

दूषित पानी आप के बच्चे के लिए टाइफाइड का आमंत्रण हो सकता है, जरुरी है की बच्चों को साफ, बोतलबंद या उबला हुआ पानी दें। जब वो ब्रश करें, तब भी उन्हें कुल्ला करने के लिए पानी उबालकर दें। अपने घर पर आप जो पानी इस्तेमाल करते हैं और पीते हैं, वह साफ हो। 

पानी को उबालना स्वच्छ पानी का सबसे आसान उपाय है। आपको पानी को तेज बुलबुले आने तक उबालना है और इसे एक मिनट तक ऐसे ही उबलने दें, ताकि सारे कीटाणु मर जाएं। इस पानी को अपने आप ठंडा होने दें और फिर जरुरत के अनुसार इस्तेमाल करें।

बड़े बच्चों और वयस्कों को फिल्टर किया गया पानी दिया जा सकता है। खाना पकाने और फलों व सब्जियों को धोने के लिए भी फिल्टर पानी या उबला कर के ठंडा किया हुआ पानी ही इस्तेमाल करना बेहतर होता है।

बच्चों को दें सही पोषण

बच्चों को चुस्त और तंदुरुस्त रखने के लिए जरुरी है की सही पोषण और सही आहार ही बच्चों को मिलना चाहिए। बच्चों को बासी भोजन या आउट डेटेड भोजन नही खिलाना चाहिए।जरुरी है की बच्चे ताजा और  सेहतमंद भोजन खाएं। 

बाहर घुमने जाने पर अक्सर बच्चे ठेले पर या बाहर कसी तरह के खुले में रखें पदार्थों को खाने की जिद करते है,  लेकिन ऐसे पदार्थों पर कई तरह के हार्मफुल बैक्टीरिया होते है, जो कई तरह की बीमारियों का कारण हो सकता है। ऐसे में आप बच्चे को बाहरी पदार्थ खाने से मना करना चाहिए और बेहतर है कि आप घर पर बना खाना अपने साथ ले जाएं। अगर आप बाहर खाना खाने जाते है, तो भी अपने बच्चे के लिए सेहतमंद भोजन ही चुनें। 

अगर आप का बच्चा 6 माह के भीतर है तो आप किसी भी स्थिति में बच्चे को नियमित स्तनपान कराएँ। इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि टाइफाइड माँ के दुध के जरिये शिशु तक पहुंच सकता है। इसलिए, शिशु जब भी चाहे उसे स्तनपान करवाएं।

स्वच्छता का पालन करें

अपने घर पर स्वच्छता हेतु कुछ नियम जरुर बनाएं और  आप और आपके परिवार के सभी सदस्य स्वच्छता के नियमों का सही तरह से पालन करें।आप हाथ धोने सम्बन्धी कुछ ऐसे नियम बना सकते है।

  • खाना बनाने से पहले
  • खाना खाने से पहले
  • शिशु को स्तनपान करवाने या खाना खिलाने से पहले
  • शौचालय के इस्तेमाल के बाद
  • शिशु की नैपी बदलने या उसका मल साफ करने के बाद
  • पालतू जानवरों को छूने के बाद

याद रखें बच्चे हमेशा बड़ों का अनुसरण करते है, यदि घर में बड़े स्वच्छता के नियमों सम्बन्धी संवेदनशील है तो यक़ीनन आप के बच्चे भी स्वच्छता के प्रति जागरूक रहेंगे।

खाना बनाने वाली जगह पर सफाई का ध्यान रखना आवश्यक होता है। अपने किचन में और खाने के मेज को हमेशा स्वच्छ रखें । अपने किचन को नियमित रूप से साबुन और पानी या फिर रसोई के लिए उपयुक्त क्लीनिंग सोल्यूशन से साफ करें। ऐसे भोजनों को फेंक दें, जिनकी इस्तेमाल करने की तिथि समाप्त हो चुकी हो। खराब खाना आपको और आपके शिशु को बीमार बना सकता है।

वैक्सीन के जरिए बचाव 

टाइफाइड के टीके टाइफाइड को रोकने में मदद करते हैं। इस बीमारी के खिलाफ टीकाकरण जरूरी है, अन्यथा, यह गंभीर जटिलताओं को जन्म दे सकता है। टाइफाइड छोटे बच्चों को हानिकारक रूप से प्रभावित करता है। टाइफाइड की रोकथाम के लिए विभिन्न प्रकार के टीके उपलब्ध हैं। यह जानने के लिए कि कौन-सा टीका आपके बच्चे के लिए उपयुक्त होगा, आपको हमेशा अपने डॉक्टर्स या पेडिअट्रिशन (बाल रोग विशेषज्ञ) से परामर्श करना चाहिए।

टाइफाइड के टीके के प्रकार

टाइफाइड एक गंभीर समस्या है और इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। टाइफाइड के टीके दो प्रकार के होते हैं:

  • टाइफाइड पॉलीसैकराइड वैक्सीन
  • टाइफाइड कंजुगेट वैक्सीन

टाइफाइड से बचने के लिए किसे टीकाकरण करवाना चाहिए?

आमतौर पर, नीचे बताए गए लोगों के लिए टाइफाइड के टीकाकरण की सिफारिश की जाती है:

  • भारत में पैदा होने वाला प्रत्येक बच्चा
  • वे लोग, जो किसी संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में हैं
  • वे लोग, जो साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया के संपर्क में काम करते हैं

भारत में, हालांकि, टाइफाइड के नियमित टीकाकरण की सलाह दी जाती है क्योंकि हमें संक्रमण का खतरा अधिक है। शिशुओं को टाइफाइड का टीका जल्दी ही, 9-12 महीने की उम्र में भी दिया जा सकता है।

टाइफाइड कंजुगेट वैक्सीन या टीसीवी तब दी जाती है, जब बच्चा 9 से 12 महीने का होता है। आईएपी (इंडियन एकेडमी ऑफ़ पेडियाट्रिक्स) के दिशानिर्देशों के अनुसार, टीसीवी की बूस्टर खुराक देने की आवश्यकता नहीं है।

सम्बन्धित सवाल – FAQ

टाइफाइड बुखार को ठीक होने में कितने दिन लगते हैं?

ज्यादातर मामलों में बच्चे इलाज शुरू होने के दो से तीन दिन में बेहतर महसूस करने लगते हैं। साथ ही यह बच्चे की स्थिति पर भी निर्भर करता है। हालांकि, अगर सही वक्त पर इलाज शुरू हो जाए, तो बच्चे को ठीक होने में कुछ हफ्ते लग सकते हैं। इसके अलावा 20% मामलों में यह ठीक होने के बाद भी दोबारा हो सकता है। इसलिए, अगर बच्चा ठीक भी हो जाए, तो जब तक डॉक्टर दवा बंद करने को न कहे, तब तक बच्चे को दवा देते रहें।


डॉक्टर के पास कब जाएं?

जैसा कि आपको ऊपर टाइफाइड बुखार के लक्षणों के बारे में बताया गया है, उसे ध्यान में रखते हुए जैसे ही आपको अपने बच्चे में प्रारंभिक लक्षण दिखे, तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। अगर उपचार के बाद भी इसके लक्षण बच्चों में दोबारा दिखें, तो बिना देरी किए बच्चे का चेकअप करवाएं। इसके अलावा, अगर बच्चे को गंभीर पेट दर्द, कम पेशाब या कोई नए लक्षण दिखे, तो बच्चे को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।


टाइफाइड में क्या खाना चाहिए?

टाइफाइड में फलों में केला, चीकू, पपीता, सेब, मौसमी, संतरे का सेवन किया जा सकता है. – टाइफाइड में दाल, खिचड़ी, हरी सब्जियां पालक, पत्तागोभी, फूलगोभी, गाजर और पपीता खाएं। टाइफाइड में दही खाने से बहुत लाभ मिल सकता है।


संबोधन

टाइफाइड के लक्षण (typhoid ke lakshan) के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आप को बताना चाहते की  टाइफाइड एक गंभीर बीमारी है। अगर इसका वक्त रहते इलाज न किया गया, तो यह बच्चे के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए जरुरी है की अप्पने आसपास स्वच्छता का ध्यान रखें, स्वच्छ और साफ पानी पिए और सेहतमंद भोजन करें। यदि यह जानकारी आप को महत्वपूर्ण लगती है तो इसे अपने दोस्तों में शेयर करें

बच्चों में टाइफाइड के लक्षण और उपाय
बच्चों में टाइफाइड के लक्षण और उपाय

मेरा नाम SANDEEP DHORE हैं, और मैं CHILD-CARE इस Blog का फाउंडर हूं। साथ ही में कई वेबसाइट के लिए Content Writings भी करता हूं। इस ब्लॉग द्वारा में नवजात तथा छोटे बच्चों के Health, Care, Fashion, Products और Lifestyle से जुड़ी जानकारी देता हूं, ताकि Parents को अपने बच्चों से जुड़े सवालों के जवाब मिल सकें।

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