baby malish tips in hindi जाने बच्चों के मालिश से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।

 

baby malish tips in hindi
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बच्चे की मालिश सबसे ज्यादा important होती है। बच्चे की अच्छी growth के लिए, उनके बौद्धिक तथा मानसिक विकास के लिए भी मालिश बहुत ज्यादा important होती है। जब एक मां या parents अपने बच्चे की मालिश करते है, मालिश करते करते बच्चे से बातें करते है, उन बातों से और उनके touch से बच्चे और parents में काफ़ी अच्छी bonding बनती है। इसलिए हमें बच्चे की मालिश करते वक्त पूरे उत्साह और positive thinking से मालिश करनी चाहिए। आज हम baby malish tips in hindi (बेबी मालिश टिप्स इन हिंदी) के इस आर्टिकल में बच्चों के मालिश से जुड़े कुछ बातों को जानेंगे।

बेबी मालिश टिप्स इन हिंदी (baby malish tips in hindi)

बच्चों के जन्म के बाद parents के दिमाग में कई सवाल आते है। जिस मे से एक है बच्चों की बॉडी मसाज। बच्चों के मालिश को लेकर भी parents के दिमाग में कई सवाल आते है। जिन सवालों को हमने baby malish tips in hindi (बेबी मालिश टिप्स इन हिंदी) के इस article में cover करने का प्रयास किया है। और इन सवालों केे जवाब ढूंढ़ने।

baby malish से जुड़ें सवाल
बच्चों की मालिश करनी चाहिए या नहीं करनी चाहिए? बच्चों की मालिश कब से शुरू करनी चाहिए? कौन से समय बच्चों की मालिश करनी चाहिए? बच्चों के मालिश कौन से तेल से करनी चाहिए? बच्चों की मालिश कितनी देर तक करनी चाहिए? कब हमें बच्चों की मालिश नहीं करनी चाहिए? किस तरह से बच्चों की मालिश की जाती है? बच्चों की मालिश कब बंद कर देनी चाहिए?

इस baby malish tips in hindi के article में हम आपको बताएंगे की बच्चों में मालिश के क्या क्या benefits होते है। बच्चों की mental, social और physical development में बच्चों की मालिश सबसे ज्यादा helpful होती है। पहले तो यह समझना होगा कि मालिश से बॉडी को relief मिलती है। और skin relax और फ्रेश होती है। मांसपेशियों को आराम मिलता है।

अगर parents सोंचते है कि छोटे बच्चे तो as it is relax होते है। उनकी activity तो इतनी होती नहीं तो फिर उन्हें आराम की क्या जरूरत? तो आपको बता दे कि relaxation की सबसे ज्यादा जरूरत छोटे बच्चों को ही होती है। वह इसलिए कि इस age में बच्चे अपना maximum time लेटे हुए spend करते है इस वजह से उनकी back दर्द करती है। बच्चों की थोड़ी activity भी उनके लिए बहुत ज्यादा होती है।

इसलिए उनकी body को strength होने की जरूरत होती है। उनकी पूरी body में blood circulation की जरूरत होती है। और इन सब reason के वजह से बच्चों को सबसे ज्यादा relax होना जरूरी होता है और मालिश उसमें बहुत मददगार साबित होती है।

बच्चों को मालिश से दूसरा फायदा यह होता है जब आप बच्चे के पर मालिश करते है और tummy exercise बच्चे को कराते है मालिश के दौरान तब उस के digestion पर बहुत फरक पड़ता है। क्यों कि बच्चे सबसे ज्यादा digestion के वज़ह से ही रोते है। बच्चे दूध पीते है वह ठीक से digest नहीं हो पाता और gas ज्यादा होती हैं तो उसके लिए भी मालिश बहुत उपयोगी साबित होती है।मालिश से बच्चों को नींद बहुत अच्छी तरह से आती है।

मालिश के बाद गुनगुने पानी से नहाने के बाद बच्चा काफ़ी relax महसूस करता है। मालिश से बच्चों के जोड़ों में को दर्द होता है उस से बच्चों को आराम मिलता है। मालिश से बच्चों की स्किन को भी आराम मिलता है। Skin glow करती है।

और सबसे ज्यादा मालिश का फायदा यह है कि जब हम बच्चे की मालिश करते है तब बच्चे हमारा टच महसूस करते है। हम baby malish tips in hindi के इस articles के माध्यम से आपको बताना चाहेंगे कि Parents और बच्चे के बीच में बहुत अच्छी bonding बनाने का काम मालिश करती है।इसलिए जब भी आप बच्चे की मालिश करेंगे तो free of mind से और positive thinking के साथ करें।


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बच्चों की मालिश कब से शुरू करनी चाहिए। baby malish tips in hindi

Baby malish tips in hindi के इस आर्टिकल में बच्चों की मालिश जब शुरू करनी चाहिए इस बात को रखना जरूरी लगता है। क्यो कि कई गलत धारणा और रीतिरिवाज़ों से कई ऐसे गलत बातें सामने आती है। कोई कोई perents जन्म के 2-3 दिन बाद ही मालिश शुरू कर देते है जो की गलत बात है।

हमें बच्चों की मालिश के लिए कोई जल्दी नहीं करनी है। Parents के लिए यह जानना बहुत आवश्यक है कि अपने नवजात शिशु की मालिश कब से start करें। देखिए normally 9 महीने में बच्चा पैदा होता है वह healthy होता है। बच्चे का weight भी 3.5kg के आसपास होता है।तब जन्म से 10 से 12 दिनों के बाद बच्चे की मालिश शुरू करनी चाहिए।

अगर बच्चा कम दिनों में पैदा हुए है। 9 month के पहले ही पैदा हुआ है।जिसका weight 3kg ता उस से कम है।बच्चा unhealthy है तो भी हमें बच्चे की मालिश start करने के लिए जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। ऐसे वक्त महीने डेढ़ महीने बाद जब बच्चा थोड़ा healthy हो जाए तब मालिश शुरू करनी चाहिए।

कौन से समय बच्चों की मालिश करनी चाहिए। Baby malish tips in hindi

देखिए यह भी एक सवाल काफ़ी parents के मन में आता है। या कोई parents समझ नहीं पाते कि बच्चे को दिन में कितनी बार मालिश करनी है। या कुछ parents को लगता है दिन में दो तीन बार मालिश करना अच्छा नहीं है। ऐसे काफी सवाल parents के मन में आता है। हम baby malish tips in hindi के इस आर्टिकल्स के माध्यम से सभी parents को सूचित करना चाहते है कि मालिश के कोई side effect नहीं है।

आप को एन में दो या तीन बार भी मालिश कर सकते है। लेकीन normally जो बच्चे के लिए भी sufficient है दिन में दो बार मालिश करनी चाहिए। पहले सुबह के वक्त और दूसरी रात के वक्त बच्चे को मालिश कर के सुला सकते है। जिसे हम sleeping massage भी कहते है।

बच्चों के मालिश कौन से तेल से करनी चाहिए। Baby malish tips in hindi

काफ़ी महत्वपूर्ण प्रश्न है इसलिए हमने हमारे baby malish tips in hindi के इस article में इसे शामिल किया है। कई parents को पता ही नहीं होता की किस oil से baby की मालिश करनी है। पहले तो हमें यह समझना होगा कि नया नया बच्चा इस दुनिया मे आया हैं। उसकी skin एकदम कोमल और काफ़ी sensetive है। हमें यह देखना होगा कि जो चीज़ हम बच्चे की skin को लगा रहे है। जिस से बच्चे की मालिश कर रहे है वह बच्चे के skin के लिए harmful तो नहीं है।

आज भी कई लोग जो पुराने खयालातों के होते है वह बच्चे की मालिश के लिए सरसों का तेल इस्तेमाल करते है। जो कि सब से गलत बात है। सरसों के तेल में sulphur नाम के content की मात्रा अधिक होती है जिस से बच्चों में rashes होने के chanchage होते है।

Mustered oil (सरसों का तेल) बच्चों के skin के लिए काफ़ी harmful होता है। सरसों का तेल जिसे हिंदी में “कड़वा तेल” भी बोलते है जो बच्चों की skin के लिए सचमुच कड़वा होता है।

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तो यकीनन यह सवाल आता है कि की हम बच्चों की मालिश के लिए कौन सा तेल इस्तेमाल करें? देखिए मार्केट में बच्चों के मालिश के कई तरह के तेल आसानी से उपलब्ध हो जाते है। अगर आप वी नहीं effort कर सकते तो आप coconut oil का भी इस्तेमाल कर सकते है जो बच्चों की skin के लिए काफ़ी अच्छा माना जाता है। गर्मियों के दिनों में हम Coconut oil का इस्तेमाल कर सकते है। और सर्दियों में हम olive oil और बादाम के तेल का इस्तेमाल कर सकते है।Olive oil से भी कभी कभी rashes आ सकते है। लेकीन इस से कोई फ़िक्र की बात नहीं।

बच्चों की मालिश कितने देर तक करनी चाहिए?

बच्चे की मालिश करते वक्त हमें time limit रखना चाहिए। 15 से 20 मि तक हमें बच्चे की मालिश करनी चाहिए। लेकीन आप के पास यदि time की कमी है तो आप को कम से कम 10 मि. तक बच्चे की मालिश करनी ही चाहिए। इस दौरान अगर मालिश करते वक्त बच्चा थक जाए या रोने लगे या फिर चिड़चिड़ा है जाए तब जबरदस्ती मालिश नहीं करनी चाहिए। उसे एक बार अपना feed कराइए। और जब बच्चा फिर comfortable हो जाए तब आप मालिश continue कर सकते है।

 

कब हमें बच्चों की मालिश नहीं करनी चाहिए।

बच्चे के जन्म के साथ ही जिस नाल से baby और मां attach होते है वह नाल डॉक्टर्स कुछ दूरी से काट देते है। और जो नाल का हिस्सा बच्चे से जुड़ा होता है वह भी 7 से 10 दिनों में गिर जाता है। इसलिए शुरवात के 10 से 12 दिन हमें बच्चे की मालिश नहीं करनी है। क्यों कि नाल किडनी सेजुदी होती है और अगर उसमें कुछ infection आ जाता है तो वह बच्चे के किडनी को affect कर सकता है।

दूसरी बात यह कि जब बच्चा बीमार हो या कोई viral feaver से ग्रस्त हो तो हमें बच्चे की मालिश नहीं करनी है। मालिश body को rise करती है। जिस से body में गर्मी आती है। Feaver में बॉडी पहले से बी गर्म होती है। इसलिए feaver के दौरान हमें बच्चे की मालिश नहीं करनी चाहिए।

किस तरह से बच्चों की मालिश की जाती है। baby malish tips in hindi

 


पहले करें सिर पर मालिश।

सबसे पहले हमें अपने हाथ पर oil लगा लेना है। जिस से कोई friction नहीं होगा और बच्चे के body पर आप smoothly मालिश कर सकते हो जिस से बच्चे को भी काफ़ी अच्छा लगेगा।सबसे पहले हमें बच्चे के सिर पर मालिश करनी है। सिर का area और skin बहुत ही soft होती है। इसलिए carelly हमें हल्के हाथों से circullar motion में oil को अच्छे तरीके से scalp पर spread करके softly मसाज करना है। बहुत important है कि आप सिर पर बिल्कुल ही pressure ना लगाए। सिर पर ऑयल को अच्छी मालिश करने से बच्चा काफ़ी relax महेसुस करता है। और सिर पर मालिश करने से बच्चे के बालों को भी पोषण मिलता है।


चेहरे पर करें हल्की मालिश।

इसके बाद हम बच्चे के चेहरे का area cover करना है। अंदर से बाहर की तरफ़ circullar motion में हमें मसाज करना है। दोनों हाथों के अंगूठे से बच्चे के आइब्रो से हमें circullar motion में धीरे धीरे soft हाथों से मसाज करना है। फिर नाक के सेंटर point से धीरे धीरे गालों की तरफ मसाज करना है। उसके बाद बच्चे के lip area को भी अच्छे से मसाज करना है। और फिर हल्के हाथों से कानों को भी अच्छे से मसाज करना है।


अप्पर body मलिश।

अगली जो स्टेप है वह है uppar body की मालिश जिसके लिए हमें अपने हाथों को फिर से तेल लगा लेना है। और हमें बच्चे के cheast पर, पेट पर और हाथों पर अच्छे से तेल लगा लेना है। पहले हमें cheast पर circullar motion में बच्चे के गर्दन तक अच्छे से मसाज करना है।

उसके बाद हमें बच्चे के पेट पर हल्के हाथों से पेट की ऊपर से नीचे तक अच्छे से मसाज करे। उसके बाद अपनी उंगलियों से बच्चे के पेट पर circullar motion में हल्के से push करें जी से बच्चे के पेट मे बन रही gases realise होती है वह निकलने मे काफी मदद मिलती है और बच्चों को बहुत आराम feel होता है। पेट की मसाज को बच्चे काफी enjoy करते है।


हाथ और पैरों की मालिश।

और अब हमें बच्चे के टांगों कि मसाज करने की लिए अपने हाथों पर तेल लगा लेना है। फिर बच्चे के टांगों को अच्छे से लगाकर अन्दर से बाहर की तरफ circullar motion में एक के बाद एक ऐसे दोनों भी टांगों को अच्छे से मसाज करना है। इसी तरह बच्चे के हाथों को भी मसाज करना है।


हल्के हाथों से करें back को मालिश।

अब और एक बार अपने हाथों में अच्छे से तेल लगाकर बच्चे के back को मसाज करना है। इसलिए बच्चे को पेट के बल लिटाकर उसकी back को अच्छे से तेल लगाए। अब बिल्कुल हल्के हाथों से बच्चे के nack से लेकर bottom तक ऊपर से नीचे तक मालिश करनी है। बच्चे के spine (रिड की हड्डी) के दोनों तरह circullar motion में मसाज करना है। याद रहे हमें बच्चे के spine को टच नहीं करना है।

अब उसके बाद हमें हल्के हाथों से बच्चे को exercise कराना है। cycling या padeling करना है। जिस से बच्चे की पेट की gases realise हो जाए।


बच्चों की मालिश कब बंद कर देनी चाहिए।

मालिश करने के कोई भी side effect नहीं होते इसलिए आप जब तक कर सकती है। तब तक वह एक अच्छी बात है। लेकीन आमतौर पर बच्चे के दो साल की उम्र तक मालिश करना काफ़ी फायदेमंद होता है।

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आपको हमारा baby malish tips in hindi का यह आर्टिकल कैसा लगा हमें जरूर बताएं। आपके हमारे लिए कुछ suggestions हो तो वह भी हमें comment box में कॉमेंट्स कर जरूर बताए।

baby malish tips in hindi
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मेरा नाम SANDEEP DHORE हैं, और मैं CHILD-CARE इस Blog का फाउंडर हूं। साथ ही में कई वेबसाइट के लिए Content Writings भी करता हूं। इस ब्लॉग द्वारा में नवजात तथा छोटे बच्चों के Health, Care, Fashion, Products और Lifestyle से जुड़ी जानकारी देता हूं, ताकि Parents को अपने बच्चों से जुड़े सवालों के जवाब मिल सकें।

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