1 month baby care 1 महीने के बच्चे की care कैसे करें?

हर महिला के लिए माँ  बनने का एहसास काफी सुखद होता है और साथ ही अपने आनेवाले Baby की Care से थोडा परेशान करने वाला भी होता है। शिशु के जन्म के बाद एक माँ किस तरह से अपने Baby की केयर कर सकती है या करनी चाहिए? शिशु के जन्म के बाद पहले महीने में शिशु का कैसे ख्याल रखना है? शिशु की देखभाल के लिए हमें खासतौर पर किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए? और कौन सी बातों को हमें Avoid करना चाहिए? पहले महीने में शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास किस तरह से होता है? और पहले महीने के शिशु के लिए खास तौर पर कौनसी बातें आवश्यक है? इन सभी जरुरी बातों को हम आप के लिए इस आर्टिकल में लायें है। जिसे आप की काफी मुश्किलें कम हो सकती है।

1 month baby care
1 month baby care

 शिशु के जन्म के समय  (1 month baby care in hindi)


पहले तो हम जन्म के पहले महीने में शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास  किस तरह से होता है यह जानेंगे। साथ पाहिले महीने में Baby किस तरह की हरकते करता है यह भी समझेंगे। वैसे तो बच्चे का विकास अपने माँ के पेट से ही शुरू हो जाता है जो एक मानवीय विकास की निरंतर प्रक्रिया में शामिल है। जो शिशु के जन्म के बाद बड़ी तेजी से होना शुरू हो जाती है।1 month baby care in hindi के इस आर्टिकल में हम शिशु के पहले दिन से 1 माह के भीतर के विकास प्रक्रिया को समझेंगे।

टिप
वैसे तो आजकल हर बच्चे का जन्म हॉस्पिटल या डॉक्टर्स के निगरानी में होता है इसलिए बच्चे का जन्म होते ही माँ और बच्चे की जो केयर करनी होती है वह डॉक्टर्स और नर्सेस बखूबी करते है इसलिए हमें घबराने की जरूरत नही होती। लेकिन आज भी कई ऐसे गाव या छोटी छोटी बस्तिया हमारे देश में मौजूद है जहा अभी Hospitalization नही हुआ है उन  सभी के लिए  1 month baby care in hindi के इस आर्टिकल का महत्व ज्यादा हो सकता है।

शिशु के जन्म के तुरंत बाद क्या ख्याल रखें

    • सामान्य तौर पर शिशु के जन्म के तुरंत बाद शिशु का 2.5 से 3.5 Kg के बिच होना चाहिए इस बात का हमें खयाल रखना है। अगर शिशु का वजन इस से कम हो तो शिशु Premature Baby के Categery में आता है जिस के लिए NICU के Special ट्रीटमेंट की आवश्यकता होती है।
    • जन्म क तुरंत बाद बच्चे की गर्भनाल को काटते वक्त बच्चे की त्वचा का संपर्क माँ के शरीर से जरुर करना चाहिए जिस से शिशु के तापमान को हम सामान्य रख सकें।
    • जन्म लेते ही बच्चे का यदि माँ से संपर्क नही आता तो शिशु हाईपोथर्मिया जैसे बीमारी का शिकार हो सकता है जो उस के शरीर के तापमान के अचानक कम होने से हो सकता है।जन्म ते ही शिशु का तापमान 37॰C होता है जो माँ के स्पर्श से सामान्य हो जाता है।
    • जन्म से २४ घंटे में शिशु के यूरिन और लाटेरिन पर ध्यान देने की अवश्यकता होती है। जन्म के बाद शिशु २४ घंटे में सामान्यतौर पर 6 से ८ बार यूरिन करता है जो की एक शिशु के लिए सामान्य लक्षण है।
    • जन्म के बाद बच्चे की पौटी हरे या काले रंग की हो सकती है जो की एक सामान्य बात है। गर्भ के अंदर शिशु नाल के द्वारा अपनी माँ से जो भी ग्रहण करता है वह उस के शरीर में जमा हो जाता है जिसे मिकोनियम कहते है जो बच्चे के जन्म के बाद पौटी के रूप में शिशु के शरीर से बहार निकल जाता है। जो हरे या काले रंग का होता है।
    • शिशु के जन्म के तुरंत बाद जब बच्चे की अच्छे से साफ़ सफाई हो जाने के बाद बच्चे को माँ का गाढ़ा वाला दूध जिसे कोलोस्ट्रकम कहते है यह जरुर पिलाना चाहिए माँ का पहिला दूध बच्चे के लिए अमृत होता है जिस में कई तरह के एंटीबायोटिक मौजूद होते है जो बच्चे के Immunity System को काफी मजबूत बनाते है। माँ का पहला दूध बच्चे को कई तरह के रोगों से बचाता है।

किस तरह होता है शिशु का विकास (1 month baby care in hindi)


शिशु के जन्म के बाद एक पहिलें एक महीने में शिशु की सामान्य विकास की क्या प्रक्रिया रहती है यह समझना काफी जरुरी है। सामान्य तौर पर शिशु किस तरह से बड़ा होता जाता है यह जनना भी इसलिए आवश्यक है की  1 माह के शिशु में होनेवाले बदलाओं में Parents अच्छे से समझ सकें और अपने बच्चों के परवरिश में उन से कोई चुक ना हो।

पहलें महीने में शिशु विकास (1 month baby care in hindi)


शिशु का Weight (वजन)

 एक शिशु का जन्म होने के बाद उसका Weight कम हुआ हो भी माता पिता को चिंता करने की आवश्यकता नही होती यह  एक सरल और सामान्य बात होती है। जन्म के 7 से 10 में शिशु का Weight loss होता है और उसके बाद के सप्ताह से लेकर 10 दिनों में बच्चे का Weight बढ़ता जो जन्म के वक्त के Weight के बराबर हो जाता है और उस के बाद सामान्य तौर पर बच्चे का Weight gain होना शुरू हो जाता है।



शिशु की Height(लम्बाई)

जन्म के वक्त एक नवजात शिशु क लम्बाई साधारणतः 47.9 सेमी  से लेकर 55.8 सेमी के आसपास होती है जो की हर नवजात शिशु की सामान्य Height है। जन्म के बाद पाहिले महीने में शिशु की लम्बाई  53.1 सेमी से लेकर 59.1 सेमी के बिच बढ़ सकती है।



शिशु की नींद

 साधारण तौर पर जन्म से पहले महीने में 18 से 19 घंटों की नींद बच्चों में होती है जो अनियमित निद्रा के तौर पर बच्चों में पाई जाती है। जिस में बच्चे पहले 1 से 2 घंटे गहरी नींद में हो सकते है बाद में बच्चे की इन्द्रिय और मस्तिष्क सक्रिय रहते है। आहार ग्रहण करते वक्त ( दूध पिते वक्त) भी बच्चे सो जाते है और थोड़ी देर में और दूध पिना शुरु करते है। यह नवजात शीश उके नींद की एक सामान्य प्रक्रिया है।



शिशु की भूक

1 month baby care in hindi के इस टॉपिक शिशु की भूक को हम महत्वपूर्ण बताते है जो हर Parents के लिए महत्वपूर्ण है। क्यों की आप के शिशु का विकास पूर्ण रूपसे इस बात पर निर्भर करता है की आप अपने शिशु को अच्छे से फीडिंग करा पा रहे या नही। आप का बेबी भूख लगने पर रोता है तो आप को तुरंत उसे दूध पिलाना चाहिए। नवजात शिशु को शुरवाती दिनों में दिन में 8 से 10 बार और रत के समय 7 से 8 बार फीडिंग की आवश्यकता होती है जो उस क क्रमिक विकास के लिए एक जरुरी बात है।


शिशु के 1 महीने में ध्यान रखने वाली बातें (1 month baby care in hindi)

एक नवजात शिशु की हमें काफी केयर करनी होती है खास कर जो पेरेंट्स हाली में पेरेंट्स हुए है या पहली बार माता पिता बने है उन्हें इन सारी बातों का जरुर ध्यान रखना है जो हम इस 1 month baby care in hindi  के इस आर्टिकल में बता रहे है।


#1#

शिशु के जन्म के बाद हमे खास तौर पर साफ सफाई का ध्यान रखना होता है। शिशु और माँ  के लिए यह काफी आवश्यक है जैसे शिशु जिस कमरे में है उस कमरे को हमें अच्छे से साफ़ सूत्र रखना है बच्चे को पहनाये जाने वाले कपडे, आप के कपडे, शिशु का बिस्तर और शिशु से जुडी हर वो चीज हमें साफ़ सूत्री रखनी है। इस  हमारा शीशु किसी Viral इन्फेक्शन की चपेट में ना आयें। इस बात का हमें विशेष ध्यान रखना है।


#2#

किसी भी तरह से आप को या अन्य किसी को भी शिशु को छूना है तो उसे हाथ धोकर ही छुए। घर में ऐसा नियम बना लें की बिगर हाथों को धोये कोई भी शिशु को हाथ नही लगाएगा। हमारे या जो भी व्यक्ति बाहर से आया हो हमारे हाथों पर कई तरह के बैक्टीरिया होते है जो शिशु के लिए काफी Harmfull हो सकते है।


#3#

एक नवजात शिशु को पहले महीने में पानी या अन्य किसी भी चीज से ना नहलाये। एक साफ़ और मुलायम कपडा आप हलक गर्म या गुनगुने पानी में भिगोंकर अपने शिशु को हलके हाथों से अच्छे से पोच लें और शिशु के शरीर को अच्छे से साफ़ कर लें। बच्चे को साफ करते समय मुलायम कपड़े का ही प्रयोग करें जिसे बच्चे के शरीर पर राशेस ना पड़ने पायें।


#4#

नवजात शिशु के गर्भनाल का हमें विशेष ध्यान रखना होता है। गर्भनाल पर अपनी तरफ से या घर के किस्सी सदस्य के कहने पर भी कुछ भी नही लगाना चाहिए आप का डॉक्टर्स जो कहे सिर्फ उसके मुताबिक ही गर्भनाल की देखभाल करनी चाहिये। उस में किसी नही तरह का इन्फेक्शन हो जाएँ तो इस की  जानकारी तुरंत अपने डॉक्टर्स को देनी चाहिए।


#5#

एक नई माँ को अपने नवजात शिशु को उठाने के तरीकों को सिख लेना चाहिए यह बहुत जरुरी है क्यों की आप का बच्चा अभी बहुत ही नाजुक है जिसे उठाने के लिए आप को अपने एक हाथ से बच्चे के गर्दन तथा दुसरे हाथ से बच्चे के रीड के हड्डी को साहारा देना होता है। जो कुछ दिन के अभ्यास से आप जल्दी सिख जाते हो।


#6#

अगर बच्चा रो रहा है तो आप बच्चे को गोदी में उठाकर फीडिंग करा दें या बच्चा फीडिंग न करना चाहता हो तो बच्चे को हलके हाथों से थपथपाए यदि फिर भी बच्चा रोना बंद नही कर रहा है तो बच्चे के डायपर को चेक करे और यह सुनिश्चित करें की बच्चा कोई परेशानी में तो नही है अगर बच्चे को कोई परेशानी हो तो तुरंत अपने डॉक्टर्स को दिखाएँ।


#7#
अपने नवजात शिशु को कभी हवा में ना झुलाये यह बच्चे के लिए काफी खतरनाक हो सकता है। एक माँ के लिए यह काफी महत्वपूर्ण है की वह अपने बच्चे को ज्यादा से ज्यादा अपना स्पर्श कराएँ या ज्यादा से ज्यादा बच्चे को अपने सिने से लगाकर रखें अपने दिल की धडकनों से बच्ची को जोड़ने की ज्यादा से ज्यादा कोशिश करें बच्चे के मानसिक विकास के लिए यह एक महत्वपूर्ण बात है। विज्ञानं भी इस बात की पुष्टि करता है।


#8#
 एक माँ के लिए यह जरुरी है की वह अपने नवजात शिशु से ज्यादा से ज्यादा बातें करें , माँ का शारीरिक स्पर्श , माँ की धड़कन, और माँ के शब्द बच्चे के मानसिक शारीरिक और सम्पूर्ण विकास के लिए काफी महत्वपूर्ण होते है।


#9#

नवजात शिशु के डायपर को बार बार चेक करें और यदि आप को अपने शिशु का डायपर गिला दिखें तो उसे तुरंत बदल देना चहिये। 1 महीने के शिशु के लिए डायपर के बजाय आप नर्म कपडा आप Use कर सकते है। डायपर से नवजात शिशु को राशेस होने का खतरा इसलिए रहता है की कभी हम डायपर Change करना भूल जाते है जो हमारे बच्चे के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।


#10#
जब भी आप अपने बच्चे को फीडिंग कराते हो, दूध पिलाते हो तो  उस के बाद बच्चे को थोड़ी देर कंधेपर लेकर जरुर थपथपाना चाहिए जिसे हम बच्चे को अच्छे से डकार दिला सकें। याद रहे दूध पिलाने के बाद बच्चे को डकार दिलाना काफी जरुरी है।


माँ के लिए जरुरी है की संतुलित एवं पोषण तत्व से भरपूर आहार लेना चाहिए जिसे बच्चे को दूध से भरपूर पोषण तत्व मिलें और माँ और शिशु दोनों स्वस्थ और तंदुरुस्त रहें।


1 month baby care in hindi  के इस आर्टिकल में बताये गए TIPs आप के लिए और आप के बच्चे के लिए जरुर फायदेमंद साबित होंगे।

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